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9 अक्टूबर 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
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भाजपा छोड़ सपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा, अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का लिया संकल्प

भाजपा छोड़ सपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा, अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का लिया संकल्प
भाजपा छोड़ सपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा, अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का लिया संकल्प — राजनीति | City News 24

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल का सिलसिला तेज हो गया है। इसी बीच पूर्व मंत्री प्रोफेसर राम आसरे कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया है। 17 सितंबर 2026 को लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। करीब 13 साल बाद उनकी समाजवादी पार्टी में वापसी हुई है।

अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का लिया संकल्प

समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा ने अखिलेश यादव को दोबारा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की बात कही। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि जब तक अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। कुशवाहा ने कहा कि उन्हें आज भी ऐसा महसूस होता है कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव उनके बीच मौजूद हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को भी वही पदवी और सम्मान मिलने की बात कही, जो मुलायम सिंह यादव को मिलता था।

सम्मान को लेकर दिया बयान

सपा में वापसी के दौरान राम आसरे कुशवाहा ने कहा कि जहां सम्मान होगा, वहीं कुछ मिलेगा। उन्होंने राजनीति, रिश्तेदारी और व्यवसाय का उदाहरण देते हुए सम्मान के महत्व पर जोर दिया। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में भाजपा छोड़ने और सपा में वापसी के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके बयान से उनके पार्टी बदलने के सभी कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती है।

छह बार मंत्री रह चुके हैं राम आसरे कुशवाहा

राम आसरे कुशवाहा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह उत्तर प्रदेश सरकार में छह बार मंत्री रह चुके हैं। वह कानपुर क्षेत्र के सरसौल विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर बहुजन समाज पार्टी से शुरू हुआ था। वर्ष 1996 में वह बसपा के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी में प्रवेश किया और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं और मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। 2013 में सपा से अलग होकर भाजपा में हुए थे शामिल राम आसरे कुशवाहा वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव थे। इसी दौरान मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर उनके रुख और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए थे। इसके बाद उन्हें पार्टी के पद से हटा दिया गया और बाद में वह सपा से अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने भाजपा का रुख किया। अब करीब 13 साल बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर फिर से समाजवादी पार्टी में वापसी की है।

यूपी चुनाव से पहले सियासी मायने

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे समय में राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी को राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राम आसरे कुशवाहा पिछड़े वर्ग की राजनीति में अपनी पहचान रखते हैं और कानपुर क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। उनकी वापसी से सपा के संगठन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस वापसी का आगामी विधानसभा चुनाव में कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। किसी पार्टी के नेता के शामिल होने मात्र से चुनावी परिणाम या मतदाताओं के रुझान का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। निष्कर्ष पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। करीब 13 साल बाद सपा में लौटे कुशवाहा ने अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प व्यक्त किया। उनके इस राजनीतिक कदम से उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में चर्चा तेज हो गई है।

Betu Mishra
Betu Mishra
Author · City News 24
Uttar Pradesh Bahraich
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